Saturday, August 4, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 08

उपसंपादक
सम्पादकीय विभाग की संरचना में उपसंपादक वह महत्वपूर्ण कड़ी है जिसके बिना अच्छे समाचारपत्र का प्रस्तुतीकरण नहीं हो पाता . मुख्य उपसंपादक के साथ कंधे से कन्धा मिलकर उपसंपादको की टोली अख़बार के ताज़ा संस्करण को बेहतर और पठनीय बनाने में जुटी रहती है. समाचारपत्र के स्वरुप के अनुसार उसमे उपसंपादको की संख्या निर्धारित की जाती है.सहज बुद्धि से समाचार के प्रवाह को पहचानने की क्षमता उपसंपादक का विशेष गुण है.     
समाचारपत्र में विज्ञापन के अलावा समाचारों के लिए जो स्थान होता है, उसे भरने का काम उपसंपादक को निभाना पड़ता है. विभिन्न शहरों में कार्यरत समाचार पत्रों के संवाददाता  और सिटी रिपोर्टर तथा विशेष संवाददाता सहित समाचार समितियों से प्राप्त समाचारों के संपादन और शीर्षक लगाकर उन्हें मुख्य उपसंपादक के माध्यम से कम्पोजिंग और प्रेस में छपाई के लिए भेजने का दायित्व उपसंपादक के जिम्मे होता है. उपसंपादक को मशीन की नाड़ी, संस्कारी सेंसर, समाचार सर्जन तथा आज्ञात सैनिक तक की संज्ञा दी गयी है.  सुयोग्य उपसंपादक किसी भी समाचारपत्र की नीव के पत्थर होते है और उनकी संपादन कला से अख़बार कसौटी पर कसा जाता है.