Monday, December 31, 2012

Jagdish Ki Report - First Report of Year 2013

 
01 January 2013 :: Every year has a new freshness & feelings but this year has something New. A huge numbers of Devotees were seen in Temples from early morning. People offered there prayres before starting there New year. When asked to a family they told that we here to offer Prayers so that our whole year goes in Peace & this the best way to start the New Year..
Not only the temples but the Gurudwars & Church had also the same environment. People gathered here also to offer there prayers.
Wish you all a very happy & Prosperous New Year.

Monday, December 24, 2012

Friday, November 30, 2012

जगदीश की रिपोर्ट :: साल 2012 की अंतिम पहली तारीख

01 दिसम्बर 2012 :: साल 2012 के अंतिम महीने की पहली तारीख यानि खुश होने का अंतिम मौका .

Tuesday, November 13, 2012

Friday, November 2, 2012

Monday, October 29, 2012

Saturday, September 1, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 10



संवाददाता  [ रिपोर्टर ]



संपादकीय विभाग के लिए संवाददाता उस नाड़ी के सामान है जो समुद्र में समाचार रूपी जलराशि लेकर आती है. अख़बार जिस स्थान से प्रकशित होता है वहां के समाचारों के संकलन के लिए नगर संवाददाता अथवा सिटी रिपोर्टर [आवश्यकतानुसार एक से चार पांच तक ] नियुक्त किये जाते है. संख्या के अनुसार इनका कार्यविभाजन किया  जाता है. खेल, सांस्कृतिक,वाणिज्य तथा विभिन्न समारोह से सम्बंधित समाचारों का संकलन इन संवाददाताओ द्वारा किया जाता है. इसी तरह कार्यालय संवाददाता, समाचार पत्र कार्यालय में आने वाली प्रेस विज्ञप्रियो के आधार पर समाचार बनाते है. सीनियर रिपोर्टर को चीफ रिपोर्टर बनाया जाता है जो अपने सहयोगी संवाददाताओ से काम लेते है. समाचारपत्र प्रकाशन केंद्र से बाहर के शहरो में भी अंशकालीन संवाददाता [ स्ट्रिगर ] नियुक्त किये जाते है जो समाचारों को प्रेषण का काम करते है.


Sunday, August 19, 2012

World Photography Day :: 19th August.

19 August 2012 :: World Photography Day originates from the invention of the Daguerreotype, a photographic processes developed by Joseph Nicèphore Nièpce and Louis Daguerre. On January 9, 1839, The French Academy of Sciences announced the daguerreotype process. A few months later, on August 19, 1839, the French government announced the invention as a gift "Free to the World". With the help of Photography our knowledge about any thing & every thing of the Universe has increased leaps and bound. This is the day to pay tributes and remember the inventore and pioneers of photography and highlight their contributions.

Saturday, August 18, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 09


विशेष संवाददाता 

जैसा की नाम से विदित है विशेष संवाददाता की अपने समाचारपत्र में अहम् भूमिका है. वह एक तरह से अपने पत्र का प्रतिनिधि होता है. वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर विशेष संवाददाता की नियुक्ति की जाती है. अपने नाम के अनुरूप विशेष संवाददाता  अख़बार के लिए विशिष्ट [ Exclusive ] समाचार देने का प्रयास करते है. केंद्र स्तर पर तथा राज्यों की राजधानियों में विशेष संवाददाता को संसद तथा विधान सभा के कवरेज और किसी मंत्रालय या विभाग विशेष की जिम्मेदारी दी जाती है. वह विशिष्ट व्यक्तियो से अपने समाचारपत्र के लिए इन्टरव्यू लेता है तथा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, या मंत्रियो के साथ आवश्यकतानुसार विदेशी दौरों में साथ जाता है.
विशेष संवाददाता एक स्वतंत्र पंछी के सामान है जो अख़बार के रोज़मरा कार्यो से बंधा नहीं होता है लेकिन समाचारों तथा घटनाक्रम के बारे में उसकी गिद्ध दृष्टि होती है. इसी आधार पर वे राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय घटनाक्रम को बेहतर समीक्षा करने में समीक्षा होते  है.

Saturday, August 11, 2012

Jagdish Ki Report :: Seasons of Sequels in Bollywood.


 Bollywood industry is now a days busy in making part 2’s & part 3’s. The entire industry seems to be seized with the sequels. Bollywood has finally joined with hollywood in the business of making sequels. Industry is adopting it as a tradition of making a continuation or an extension to the former ones.
Sequels have become hot subjects these days, as they are spelling out big business to the movie makers. The trend is continuing that, if the first part (Original) movie is doing really well at the box office, immediately the film-makers are planning for its sequel. Movies are coming up at faster rate.
It is no more a surprise these days that the sequel to the movies is planned even before the prequels are hitting the big screens. It’s worth mentioning that the conclusions to the stories are being kept open ended in the scripts, hence ensuring that there is enough scope to make a sequel.
By utilizing the brand value of the prequels, film makers are coming up with the extended scripts to the parent movies while, the characters and the cast remains same as in the prequels.

Monday, August 6, 2012

Sunday, August 5, 2012

Jagdish ki Report :: Friendship Day In Future

  Friendship Day is celebrated every year, on the first Sunday of August. In 2012, it is celebrated on 5th August. The day for the occasion was declared by the US congress in 1935. The occasion began as a small event, to commemorate the relation shared by friends.


Friendship Day celebrations occur on different dates in different countries. The first World Friendship Day was proposed for 30 July 1958. On 27 April 2011 the General Assembly of the United Nations declared  30 July as official International Friendship Day. However, some countries, including India, celebrate Friendship Day on the first Sunday of August &  July 20 in Argentina, Brasil and Uruguay, &  July 30 in Paraguay.

The exchange of Friendship Day gifts like flowers, cards and wrist bands is a popular tradition of this occasion.




 Friendship Day In Future

Year      Date
2012     August 5
2013     August 4
2014     August 3
2015     August 2
2016    August  7
2017    August  6
2018    August  5
2019    August 4
2020    August 2

Saturday, August 4, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 08

उपसंपादक
सम्पादकीय विभाग की संरचना में उपसंपादक वह महत्वपूर्ण कड़ी है जिसके बिना अच्छे समाचारपत्र का प्रस्तुतीकरण नहीं हो पाता . मुख्य उपसंपादक के साथ कंधे से कन्धा मिलकर उपसंपादको की टोली अख़बार के ताज़ा संस्करण को बेहतर और पठनीय बनाने में जुटी रहती है. समाचारपत्र के स्वरुप के अनुसार उसमे उपसंपादको की संख्या निर्धारित की जाती है.सहज बुद्धि से समाचार के प्रवाह को पहचानने की क्षमता उपसंपादक का विशेष गुण है.     
समाचारपत्र में विज्ञापन के अलावा समाचारों के लिए जो स्थान होता है, उसे भरने का काम उपसंपादक को निभाना पड़ता है. विभिन्न शहरों में कार्यरत समाचार पत्रों के संवाददाता  और सिटी रिपोर्टर तथा विशेष संवाददाता सहित समाचार समितियों से प्राप्त समाचारों के संपादन और शीर्षक लगाकर उन्हें मुख्य उपसंपादक के माध्यम से कम्पोजिंग और प्रेस में छपाई के लिए भेजने का दायित्व उपसंपादक के जिम्मे होता है. उपसंपादक को मशीन की नाड़ी, संस्कारी सेंसर, समाचार सर्जन तथा आज्ञात सैनिक तक की संज्ञा दी गयी है.  सुयोग्य उपसंपादक किसी भी समाचारपत्र की नीव के पत्थर होते है और उनकी संपादन कला से अख़बार कसौटी पर कसा जाता है.      

Tuesday, July 31, 2012

जगदीश की रिपोर्ट :: आज पहली तारीख है.





01 अगस्त 2012 ::   महीने की पहली तारीख, क्या आप बता सकते है की,
 कौन कौन खुश है, की आज पहली तारीख है .

Sunday, July 29, 2012

जगदीश की रिपोर्ट :: अंतिम सोमवारी

Lord Shiva in Sirsa, Haryana.

सावन के अंतिम सोमवार को शिवालयों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा. चहुंओर ऊं नम: शिवाय: और बम-बम भोले की गूंज रही.  सावन का अंतिम सोमवार होने के कारण मंदिरों में खासी भीड़भाड़ रही. शिव भक्तों ने ओम् नम: शिवाय का उच्चारण करते हुए महादेव पर जल व दूध की धारा बहाकर कल्याण की कामना की। शास्त्रों के अनुसार श्रावण मास भगवान शंकर को विशेष प्रिय है। अत: इस मास में आशुतोष भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व है। सोमवार भगवान शंकर का प्रिय दिन है।

Saturday, July 28, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 07

 मुख्य उपसम्पादक
समाचारपत्र के सम्पादकीय विभाग में मुख्य उपसम्पादक वह शिल्पकार है जिसे आम पाठक नहीं जनता लेकिन उसके सृजन को वह रोजाना अख़बार के रूप में देखता है.
प्रत्येक अख़बार के संस्करणों की संख्या के अनुरूप सम्पादकीय विभाग के सहयोगियों की टीम पारी के अनुरूप बनाई जाती है. इस पारी का मुखिया मुख्य उपसंपादक होता है. जो अपने सहयोगी उपसंपादक के माध्यम से समाचारों के संपादन में महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम देता है. समाचारों पर उपयुक्त शीर्षक लगाना समाचारपत्र के प्रथम पृष्ठ से लेकर आखरी पृष्ठ पर समाचारों के प्रस्तुतीकरण के क्रम को निर्धारित करना और संस्करण के छपने के लिए जाने तक नवीनतम समाचारों के समावेश तथा समाचार के पृष्ठों की सजावट की अहम् जिम्मेदारी मुख्य उपसंपादक के बलिष्ठ कंधो पर होती है
मुख्य उपसंपादक और उपसंपादक में मुख्य रूप से चार गुणों होना आवशयक माना जाते है. पहला बहुश्रुत और बहुज्ञ , दूसरा एकाग्रता , तीसरा सहिष्णुता गुणग्राहकता तथा मेल से कम करने की भावना और चौथा समाचार में रूचि होना आवश्यक मने गए है. मुख्य उपसंपादक में तो इनकी अनिर्वायता अतिवांछनीय है.
मुख्य उपसंपादक अपने सहयोगी उपसंपादको को उनकी रूचि के समाचारों को संपादन के लिए देता है और फिर उनकी कॉपी को जांचता है. जरुरत के अनुसार वह खुद भी संपादन करता है अथवा अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद सहित अन्य कार्य करने होते है. वह ऐसा मुख्य हलवाई है जो अपनी निगरानी में रसोई तैयार करवाता है.

Sunday, July 22, 2012

Jagdish Ki Report :: Punjabi Flavour in London Olympic - 2012

Clad in all-white apparel and a matching white turban, the sprightly, 101 years old  Fauja  Singh carried the torch of London Olympic accompanied by hundreds of admirers, including Sikhs with yellow T-shirts bearing Singh's image, who hailed him every moment of the distance he travelled.
Born in Punjab in 1911, Fauja Singh came to the United Kingdom to stay with his son Sukhjinder Singh  in 1992. He began running at the age of 86 to keep himself occupied and ran his first marathon at the age of 89. Fauja Singh has since completed nine marathons - six in London, two in Toronto, where he set eight track records, and one in New York.
Hundreds of Sikhs organised a 'langar' at 16 points along the torch relay route to celebrate Fauja Singh's efforts.
United Sikhs, the charity organisation that organised the 'langar', distributed thousands of 'roti rolls' along the torch relay route. The 'langar' was held to "celebrate the wonderful achievements of this under-spoken treasure of the Sikh community", organisers said.

Saturday, July 21, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 06

समाचार संपादक

समाचार संपादक को हम सम्पादकीय विभाग का मेरुदंड कह सकते है. खबरों के लहराते समुद्र में से मोती के रूप में चुनिन्दा समाचारों का अखबारों में प्रस्तुतीकरण समाचार संपादक की समझबुझ, कार्यकुशलता और नेतृत्वक्षमता का परिचायक होता है.
सम्पादकीय विभाग के सहयोगियों के बीच आपसी समन्वय तथा अलग अलग पारियों में उनकी ड्यूटी का निर्धारण समाचार संपादक के जिम्मे होता है. अगर अख़बार में कोई महत्वपूर्ण खबर छुट गयी है तो इसके लिए समाचार संपादक को जिम्मेवार मन जाता है. समाचारपत्र के संवाद संकलन से लेकर उसके संपादन तथा प्रस्तुतीकरण का गुरुतर उत्तरदायित्व भी निभाना पड़ता है. समाचारों से सम्बंधित सभी क्रिया कलापों का दारोमदार समाचार संपादक पर होता है. किसी भी समाचारपत्र के विभिन्न संस्करणों में जो भी समाचार प्रकाशित किये जाते है उनका उत्तरदायित्व  समाचार संपादक पर होता है. अख़बार में समाचार से सम्बंधित सभी कार्यकलाप का संयोजन समाचार संपादक को करना होता है. इसलिए उसे सतत जागरूक रहना होता है. समाचारपत्र के प्रकाशन केंद्र पर संवाद संकलन की व्यवस्था को गुरुतर दायित्व उसे निभाना होता है. वो ही समाचारपत्र से जुड़े संवाददाताओ से सीधा संपर्क रखने और समाचार विशेष के संकलन इत्यादि के बारे में आवशयक निर्देश भी उसे देने होते है. इसी तरह विदेशों में कार्यरत अपने समाचारपत्र के संवाददाताओ या ब्यरो प्रभारी से भी समाचार संपादक को संपर्क रखना होता है. बड़े समाचारपत्र में समाचार संपादक के सहयोग के लिए कई बार उपसम्पादक की नियुक्ति भी की जाती है.

Thursday, July 19, 2012

जगदीश की रिपोर्ट :: बारिश
















रांची, 20 जुलाई 2012 :: रांची में झमा झम बारिश के साथ ही शहर पानी पानी हुआ. लगातार बारिश की वजह के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया .

Tuesday, July 17, 2012

Jagdish Ki Report - Bollywood camera focused on Bihar.


Bollywood camera is focused on Bihar. But this is not for the first time that Bihar had attracted Bollywood. If we go in History, we can see a lot of films are made on the issues of Bihar.
In 'Apaharan',  Prakash  Jha tried to expose the nexus between criminals and politicians in Bihar, especially the thriving kidnapping industry, while his 'Gangajal' was spun around the in famous Bhagalpur blinding case.
Another hard-hitting political film set in Bihar was  Shool. Starring Manoj Bajpayee and national-award winner Raveena Tandon, the movie is about an honest police officer who is in a tough fight with a corrupt local politicians.
Damul, starring Dipti Nawal, highlights caste politics and bonded labour in Bihar.
In the current series  we just watched Gangs of Wasseypur, co-written, produced and directed by Anurag Kashyap. The film features Jaideep Ahlawat, Manoj Bajpai, Nawazuddin Siddiqui and Richa Chadda as the ambitious crime family from Wasseypur.  Wasseypur belongs to Dhanbad, Jharkhand [ Earliar it was a part of Bihar ]. The story of part one spans from the early 1940s to late 1990s while part two continues till 2009.The full series was screened back-to-back at the 2012 Cannes Directors' Fortnight.
Very soon we will be watching  Jeena Hai Toh Thok Daal , a  film directed by Manish Vatsalya, starring Ravi Kishen, Manish Vatsalya, Yashpal Sharma (actor), Rahul Kumar (Actor) and Hazel Crowney. The movie's storyline is a hard hitting gangster movie which shows horrid realities of the underworld crime as well as the changing times of Bihar state.

Saturday, July 14, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 05

समाचारपत्र के स्वरुप के मुताबिक संयुक्त संपादक या सहायक संपादक अथवा दोनों पदों पर अलग अलग पत्रकार की नियुक्ति कर समाचारपत्र सम्पादन के कार्यो को अंजाम दिया जाता है. इनकी मुख्य भूमिका प्रधान सम्पादक के सहयोगी के रूप में होती है और बड़े समाचारपत्रों की व्यवस्था में उनके अलग अलग कार्य निर्धारित कर दिए जाते है. सम्पादकीय विभाग के सहयोगियों के कार्यो के निरिक्षण और दिशा निर्देश के साथ सहायक सम्पादक, अग्रलेख, सम्पादकीय टिप्पणियों, राष्ट्रीय, अन्तरराष्ट्रीय घटनाकर्म  की समीक्षा, फीचर लेखन, इत्यादि प्रवार्तियो में सक्रिय रूप से हिस्सेदार होते है. इसलिए इन्हें गहन अध्ययन करना जरुरी होता है. दरअसल सम्पादकीय विभाग के ये मजबूत स्तम्भ है जो जनमत तैयार करने तथा समाचारपत्रों के माध्यम से लोक शिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है. इनका सीधा सम्बन्ध समाचारपत्र के विचार पक्ष से होता है तथा समाचारों के नवीनतम घटनाक्रम पर निगाह रखते हुए तत्काल टिप्पणी प्रस्तुत करनी होती है.

Friday, July 13, 2012

Tuesday, July 10, 2012

Jagdish ki Report.- Population


World Population day is celebrated on 11th of July every year.  In 1987 United State decided to celebrate this day as World population day. World Population is approx  6 Billion 82 Crores. It is expected to cross 9  Billion  between 2040 & 2050.
In Indian perspective, now India’s population is approx 1  Billion 22 Crores, which is three times more from the time of Independence. During independence India’s population was approx 35 Crores. Sources says that in every 10 years India’s population increases by 18 crores, which is equivalent with the population of Brazil.
According to the  Census  of  year 2011 there is down fall in the population between the year 2001 to 2011. But the population will maintain its speed than in year 2030 India will  become the higest populated country in the world.


India's Population in 2011           1.21 billion


India's Population in 2001           1.02 billion


Population of India in 1947          350 million




 India's Population 2012

Current Population of India in 2012           1,220,200,000 (1.22 billion)
Total Male Population in India               
  628,800,000 (628.8 million)
Total Female Population in India     
  591,400,000 (591.4 million)
Sex Ratio                    940 females per 1,000 males

Age structure

0 to 25 years                                50% of India's current population.

Currently, there are about 51 births in India in a minute.

Monday, July 9, 2012

Jagdish-Picture Social Daily Challenge Honorable Mention



















My Photograph Selected in Picture Social Daily Challenge under Honorable Mentions.

जगदीश की रिपोर्ट - पहली सोमवारी.

पहली सोमवारी पर शिवालयो में भक्तो की भारी भीड़,
दिलो से निकली आवाज़,
जय बाबा बर्फानी,
भूखे को खाना,
प्यासे को पानी.

Thursday, July 5, 2012

Sunday, July 1, 2012

Jagdish - Jama-Masjid - Delhi.

                                                                      Jagdish - Jama-Masjid - Delhi.

Friday, June 29, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 04

संपादक / कार्यकारी संपादक

समाचारपत्रों की प्रबंध व्यवस्था में पिछले कुछ दशको से मालिक संपादक की अवधारणा भी बलवती हुई है. इस व्यवस्था में मालिक का नाम समाचारपत्र के प्रमुख संपादक के रूप दिया जाता है तथा कार्यकारी या अधिशाषी संपादक के नाते कामकाज कोई वरिष्ठ  पत्रकार या संपादक संभालता है.

 आजकल समाचारपत्र समूहों के विभिन्न  प्रदेशो से अलग अलग संस्करण प्रकाशित किये जाने की परम्परा भी चल पड़ी है. इस व्यवस्था में स्थानीय संपादक की नियुक्ति कर सम्बंधित प्रदेश के संस्करण का प्रकाशन किया जाता है. कार्यकारी संपादक या स्थानीय अथवा प्रभारी संपादक सम्बंधित समाचारपत्र में मुख्य भूमिका निभाते है.

 रोजाना अपने सहायक संपादको की बैठक में अख़बार के नवीनतम संस्करण का मूल्यांकन और अगले संस्करण की रुपरेखा के बारे में संपादक विचार विमर्श करते है. इस बैठक में अन्य प्रतिस्पर्धी समाचारपत्रों से अपने पत्र की तुलना भी की जाती है, ताकि रह गए अथवा छुट गए समाचारों का फोलोअप हो सके. संपादक अपने सहयोगियों की उनकी योग्यता, अनुभव एवं विशेष रूचि के अनुरूप अलग अलग दायित्व  सौपता है और  सहज भाव से उनके काम का मूल्यांकन भी करता है ताकि आवश्कतानुसार भविष्य में और उतरदायित्व दिए जा सके. सम्पादकीय कार्य और निरिक्षण की इस प्रकिया में संपादक को भी विभीन्न विषयों के गहन अध्ययन तथा नवीनतम जानकारी से अवगत रहना चाहिए तभी वह अपनी टीम का सुयोग्य नेतृत्व कर पता है तथा अखबार की प्रतिष्ठा को बढाने में सफलता हासिल करता है.

Thursday, June 28, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 03

प्रधान संपादक

किसी भी समाचारपत्र का मुखिया, उसका प्रधान संपादक होता है, जिसके मार्गदर्शन में समाचारपत्र का प्रकाशन होता है.एक जमाना था जब प्रधान संपादक समाचारपत्र की रीति नीति तय करते थे और संपादक विशेष से समाचारपत्र की साख जुडी होती थी.
                             प्रधान संपादक पत्र की रीति - नीति और व्यवस्था के अनुसार सम्पादकीय विभाग के सहयोगियों के चयन से लेकर उनके बीच कार्य  - विभाजन तथा उसके निरीक्षण का दायित्व निभाते है.  समाचारपत्र में प्रकाशित की जाने वाली प्रत्येक सामग्री के लिए क़ानूनी रूप से संपादक तहत उसके प्रकाशक को उत्तरदायी मन जाता है. इसलिए संपादक शब्द की व्याख्या 1867 के प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक एक्ट में इस  प्रकार की गयी है – EDITOR MEANS THE PERSON WHO CONTROLS THE SELECTIONS OF THE MATTER THAT IS PUBLISHED IN A NEWSPAPER.  इसी नियम के अनुसार प्रकशित समाचारपत्र के प्रतेक अंक पर मुद्रक और प्रकाशक के साथ साथ संपादक का नाम भी प्रकाशित किया जाता है.
पिछले दशको से संपादक संस्था का निरंतर अवमूल्यन हुआ है. समाचारपत्रों की प्रबन्ध व्यवस्था में मालिको - प्रबंधको का सीधा हस्तक्षेप होने से सम्पादकीय स्वतंत्रता का आस्तित्व खतरे में पड़ गया है. अब समाचारपत्रों में प्रबंधक प्रधान होते जा रहे है. आर्थिक समचापत्रो में तो संपादक मार्केटिंग के पड़ सृजित  किये जाने जाने लगे है.
इस सबके बावजूद समाचारपत्रों में प्रधान संपादक या संपादक का अहम् स्थान है. जो नियमित रूप से प्रकाशित समाचारपत्र को आम पाठको तक पहुचाने का मार्ग प्रशस्त करते है. जैसा की हम जानते है की समाचारपत्र का प्रकाशन एक टीम वर्क के रूप में होता है और स्वाभाविक रूप से संपादक इस टीम का कप्तान होता है. प्रधान संपादक या संपादक, समाचारपत्र के सम्पादकीय विभाग के प्रमुख के नाते अपने सहयोगियों को आवश्यक दिशा निर्देश देता है. वह अपने वरिष्ट सहयोगियों के साथ प्राय नियमित रूप में बैठक बुलाकर विचार विमर्श करता है तथा प्रकाशित समाचारपत्र की समीक्षा के साथ अगले दिन प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र के बारे में चर्चा करता है. समाचारपत्र एक ऐसा मैदान है जहाँ पर हर रोज तथा समाचार का प्रत्येक संस्करण, मैच के सामान होता है.

Tuesday, June 26, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 02

वर्षो पहले समाचारपत्रों की छपाई तथा कम्पोजिंग की जो व्यवस्था थी उससे अब बहुत परिवर्तन हो चुका है. इससे सम्पादकीय विभाग के स्वरुप पर भी असर पड़ा है. अब कम्प्यूटर का जमाना है पहले पत्रकार हाथ से समाचार लिखते थे, फिर टाइप करके समाचार लिखने का युग आया और अब तो सीधे कम्प्यूटर पर समाचार देने का जमाना आ गया है. रिपोर्टर की डेस्क पर कम्प्यूटर का टर्मिनल लगा दिया जाता है और उप संपादक, समाचार संपादक आदि सहयोगी अपनी डेस्क पर बैठे बैठे कम्प्यूटर तकनीक से रिपोर्टर के समाचार में अवाश्कतानुसार संशोधन तथा हेडिंग लगाकर  पेज मेकर कक्ष को भेज सकते है. कम्प्यूटर की स्क्रीन पर पेज का मेकअप तथा अवाश्कतानुसार इसमें फेरबदल की गुंजाईस होती है.अब तो मॉडम तथा संचार  उपग्रह लिंक के माध्यम से पूरा अखबार एक स्थान से दुसरे स्थान पर तैयार करने की सुविधा सुलभ हो गयी है. सम्पादकीय विभाग को समाचारों का गलियारा कहा जाता है. सम्पादकीय विभाग में समाचार समितियों की टेलिप्रिंटर  मशीनो  [ अथवा कंप्यूटर मॉडम पर समाचारों की प्राप्ति ], अपने संवाददाता द्वारा प्राप्त खबरे, प्रेस विज्ञप्तियो द्वारा मिलने वाली खबरे तथा फोटोग्राफ इत्यादि  में से खबरों का चयन एवं  सम्पादन किसी समाचारपत्र के संस्करणों की संख्या के आधार पर पारी दर पारी चलता रहता है.

सम्पादकीय विभाग की संरचना
एक ज़माने में सम्पादकीय विभाग में कार्यरत पत्रकारों की संख्या उगलियों पर गिनी जा सकती थी. किन्तु अब ऐसा नहीं है. समाचारपत्रों की पृष्ठ संख्या बढने, एक से अधिक संस्करणों का प्रकाशन तथा आधुनिक तकनीक की वजह से अधिक प्रेस मैटर की जरुरत को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय, प्रादेशिक तथा स्थानीय स्तर पर भी समाचारपत्रों में पत्रकारों की संख्या पांच - दस से लेकर डेढ  से दो सौ तक पहुंची है जो विभिन पारियों में कार्य करते है. इस तरह सम्पादकीय विभाग का कक्ष सुबह के कुछ घंटे के अलावा दिन रात गतिशील बना रहता है.

Wednesday, June 20, 2012

समाचार पत्र का स्वरुप - 01

भारत में मोटे तौर पर समाचार पत्रों के स्वरुप को तीन भागो में विभक्त किया जा सकता है. इन्हें राष्ट्रीय , प्रादेशिक, और स्थानीय श्रेणी में शामिल किया जा सकता है. चूँकि नई दिल्ली हमारी राजधानी है , इसलिए वहाँ से प्रकाशित होने वाले समाचारपत्रों को राष्ट्रीय समाचारपत्र की संज्ञा दी जाती है. इनमे हिन्दी के दैनिक  हिंदुस्तान , नवभारत टाइम्स , जनसता , पंजाब केशरी, जागरण , राष्ट्रीय सहारा, आदि तथा अंग्रेजी में हिंदुस्तान टाइम्स , स्टेटमेन   , इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ़ इंडिया , द हिन्दू, इत्यादि समाचारपत्र प्रमुख रूप से शामिल है. इनमे से कुछ समाचारपत्रों ने पिछले , कई वर्षो से प्रादेशिक राजधानियों तथा अन्य केन्द्रों से अपने विभिन्न संस्करण आरम्भ किया है. इनके अलावा कुछ समाचारपत्रों यथा पंजाब केशरी, जागरण आदि ने अन्य प्रदेशो से आगे बढकर राजधानी दिल्ली से अपने संस्करण प्रकाशित कर अपने समाचारपत्रों को राष्ट्रीय समाचारपत्रों की श्रेणी में शामिल कर लिया है.
इसी तरह प्रादेशिक राजधानियों से प्रकाशित किये जाने वाले समाचारपत्र प्रादेशिक स्तर के समाचारपत्रों की श्रेणी में सम्मिलित किये जाते है. लेकिन पिछले कुछ दशको से इन समाचारपत्रों का प्रकाशन भी संभाग मुख्यालय अथवा अन्य प्रकाशन केंद्र से नए संस्करणों का प्रकाशन आरम्भ किया.
इस परिदृश्य से पहले संभाग स्तर पर या जिला स्तर पर अथवा किसी प्रमुख शहर से प्रकाशित किये जाने वाले समाचारपत्रों को स्थानीय समाचारपत्रों की संज्ञा दी जाती थी. लेकिन राष्ट्रीय या फिर प्रादेशिक स्तर के समाचारपत्रों के संस्करण जगह जगह से प्रकाशित किये जाने की प्रतिस्पर्धा में स्थानीय समाचारपत्रों का अस्तित्व भी संकट में पड़ गया है. क्षेत्रीय संस्करणों के प्रकाशन से समाचारों का दायरा भी सिमटता जा रहा है. तथा समाचारपत्र अपने अंचल तक के समाचारों तक सीमित हो गए है. स्थिति यह है हो गई है की एक संभाग या प्रमुख प्रकाशन केंद्र से प्रकाशित होने वाले संस्करण में उसी क्षेत्र के समाचारों का समावेश होता है और प्रमुख समाचारों को छोड़कर पाठक को यह पता नहीं चल पाता की राज्य के दुसरे संभाग में क्या कुछ घट रहा है अथवा वहा  के समाचार क्या है. इस स्थिति का एक लाभ यह हुआ की अब समाचारपत्रों के अलग अलग संस्करणों में उस क्षेत्र के गावों, कस्बो तक के समाचारों को स्थान मिलने लगा है. लेकिन एक अंचल से दुसरे अंचल में घटित होने वाले घटनाक्रम के बारे में लोग अनजान से रह जाते है. अलबता कोई बड़ा हादसा या दुर्घटना घटने पर सम्बंधित समाचार सभी संस्करणों में प्रकाशित किया जाता है.स्वाभाविक रूप से ऐसे समाचार राष्ट्रीय स्तर के  समाचारपत्रों में भी स्थान पाते है.